Saturday, 20 April 2019

चारपाई- अल्ताफ हुसैन “मज़ाक झास्वी”

Late Altaf Husaain "Mazak Jhansvi" a great humorous poet of his time. 
चारपाई

एक मेहमा के लिए मैंने जो मांगी चारपाई,
हो के शर्मिंदा वो पडोसी मुझसे यूँ बोला के भाई

चारपाई दो हैं मैं सो जाता हूँ अब्बा के पास,
दूसरी पर मेरी बीबी सोती है और उसकी सास,

चारपाई स्पेयर करना तो मुश्किल है जनाब,
मैंने उसकी बात सुनके यूँ दिया उसको जवाब-

मुझ को इस का गम नहीं तुम चारपाई दो न दो,
पर खुदा के वास्ते सोया सलीके से करो.


अल्ताफ हुसैन “मज़ाक झास्वी”